खेल के साथ ’बाल दिवस’

बाल दिवस जो कि बाल एंव बालाओं का मनोबल बढ़ाने के लिए हर साल 14 नवम्बर को जे.एम.सी के प्रांगण में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। बाल दिवस के 2 दिन पहले से ही प्रांगण में एक अलग जूनून एवं उत्साह सारे बच्चों में देखने को मिलता है क्योंकि दो दिन पहले से ही प्रांगण में खेल का आयोजन करवाया जाता है जिससे बच्चों का इस कोलाहल भरे वातावरण में खेल के प्रति रूचि जगे एवं मानसिक और शारीरिक विकास भलीभांति हो सके।Sports

इन्हीं सारी बातों को देखते हुए इस वर्ष भी 13 नवम्बर से ही सारे बच्चों  को अलग-अलग समूह मे बाँटकर विभिन्न प्रकार के खेलों का आयोजन किया गया। सभी बच्चों को छोटे एंव बड़े समूह ऐसे दो समूहों में बांट दिया गया। छोटे बच्चों के समूह में तीसरी से लेकर छठी तक के एवं बड़े समूह में सातवीं से दसवीं तक के बच्चे  शामिल थे। दो दिनों के अतंराल में विभिन्न प्रकार के खेलों का आयोजन किया गया था जिसमें मुख्यतः नींबू चम्मच, रस्सी कूद, कंगारू रेस, म्यूजिकल चेयर, कपल रेस, पेंसिल रेस एंव सूई धागा शामिल था। इन खेलों के अलावा इस वर्ष बच्चों की आग्रह पर एक और खेल - कबड्डी को भी शामिल किया गया । कबड्डी खेल जो बहुत मजेदार साबित हुआ। खेल का आयोजन सुबह लड़को एंव दोपहर में लड़कियो के लिए किया जा रहा था।

Sports13 नवम्बर की सुबह से ही जे.एम.सी. के प्रांगण में एक अलग माहौल देखने को मिल रहा था क्योंकि एक साल बाद खेल के क्षेत्र में उनको अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलने वाला था इसीलिए सारे लड़के समय से एक घंटे पहले आकर अपने-अपने खेल के अभ्यास में जुटे  हुए थे। क्या छोटे क्या बड़े सभी में एक अलग जोश एवं जूनून दिख रहा था। फिर प्रारंभ हुई पहले छोटे बच्चों को अपना करतब दिखाने की। और इसी सिलसिलावार से एक-एक करके सारे खेल का आयोजन करवाया गया।

13 नवंबर को लगभग 10 बजे पहले छोटे लडकों के खेल का आयोजन किया गया उसके बाद फिर बारी आई बड़े लड़कों की जिन्होने बहुत ही उत्साह से खेल मे भाग लिया एंव हरेक बच्चे ने कोई न कोई खेल में अच्छा प्रदर्षन किया। दोपहर में लड़कियो के लिए खेल का आयोजन किया गया। फिर बारी-बारी से पहले छोटे बच्चे एंव उसके बाद बड़े बच्चों का खेल करवाया गया। जिसमें उन्होंने पूरे लगन के साथ भाग लिया। और खेल दिवस को सफल बनाया। सबसे अंत में कबड्डी का आयोजन किया गया जिसमें सांतवीं व आठवीं की लड़कियों को सम्मिलित किया गया था। अगले दिन 14 नवंबर को नवीं व दसवीं के लड़को के लिए कबड़डी का आयोजन किया गया। बच्चों के आग्रह पर सभी बच्चों को एल पोकेट, सरिता विहार पार्क में ले जाया गया। जिससे उनको पूरी जगह मिल सके और वो निर्भय होकर खेल सके। मिलाजुला कर यदि हम हार जीत को थोड़ी देर के लिए अलग कर दें तो खेल दिवस बहुत ही अच्छा रहा और बच्चों को खेल के प्रति रूचि जगाने का प्रयत्न सफल रहा ।Kabaddi

14 नवंबर दोपहर में पुरस्कार वितरण हेतु कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमें छाया प्रवीण, विमला रामकृष्णन्, अतुल सागर, आशिष कुमार, बॉबी नायक एवं गुड्डीरानी मुख्य कार्यकर्ता के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम का  शुभारंभ आशिष कुमार के द्वारा सभी का स्वागत करते हुए किया गया । फिर उन्होने बाल दिवस की  जानकारी से सभी बच्चों को अवगत कराया। बीच-बीच में कार्यक्रम में नाटक एंव नृत्य का प्रदर्शन भी हो रहा था। कार्यक्रम के अंतराल में विमला राजकृष्णन, बॉबी, गुड्डी, छाया प्रवीण एंव बहुत सारे बच्चों के द्वारा अपनी-अपनी बातें रखी गई जिसका संक्षेप विवरण निम्नलिखित है-

Programmeरिमेडियल के शिक्षक आशिष  कुमार -हमें पढ़ाई के साथ-साथ सारे लोगों का आदर करना चाहिए एंव साथ ही कर्तव्यनिष्ठ होना चाहिए।

रिमेडियल के शिक्षक अतुल सागर - बाल दिवस को खेल दिवस के रूप में मनाना बहुत अच्छा तरीका है इससे बच्चों में खेल के प्रति रूचि पैदा होती है। और खेल से बच्चों का शारीरिक तथा मानसिक विकास हो पाता है। इसीलिए बच्चों से अपील है कि वह पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी हिस्सा लें। फोन, टीवी जैसे ऐसी बहुत चीजें है जिससे बच्चे आकर्षित होते जा रहे है और खेल से दूर हो रहे है। 

दसवीं कक्षा से गोलू और सैफ - दोनो ने दो दिन हुए खेल दिवस की सराहना करते हुए कहा कि यंहा पढ़ाई के साथ-साथ इस तरह का खेल हमारा शारीरिक विकास को निर्धारित करता है। 

दसवीं कक्षा से अभिषेक - मैं शुरू में जे.एम.सी. छोड़ दिया था क्योंकि कुछ लोगों ने कहा की वहॉ पढ़ाई नहीं होती है फिर मै दुबारा आना शुरू किया और मै फिर अच्छे नम्बर लाता चला गया क्योंकि मुझे जे.एम.सी. और अन्य टयूशन् में फर्क पता चल गया।

तीसरी कक्षा से शीतल - सभी बहुत अच्छे लगते है गुड्डी दीदी बहुत अच्छे से पढ़ाती है।

गुड्डी रानी - सभी को बाल दिवस की शुभकामनाएं दी।

विमला रामकृष्णन् - आप लोगों ने बहुत अच्छी तैयारी की। ऐसे ही खेल के प्रति जागरूक रहे।

अंकित़़, शिवाय, सचिन - पहले मुझे 2 का टेबल भी नहीं आता था। अब मुझे 20 तक आता है। यहां पढ़ाई अच्छी होती है।

बॉबी नायक - कार्यक्रम में खेल का आयोजन अपनी-अपनी प्रतिभाओं को निखारने के लिए किया जाता है खेल बस हार, जीत के लिए नहीं होता है जीवन में हमेशा कोशिश करते रहना चाहिए।

Prize distributionइन्हीं सब बातों के साथ कार्यक्रम का समापन छाया प्रवीण के द्वारा करते हुए उन्होने यह कहा - आजकल हमारे बच्चें खेलकूद से बाहर हो रहे हैं और मोबाइल इंटरनेट से पूरे समय बने रहते हैं इसलिये भी यह खेल समारोह करना जरूरी है व बच्चों को खेल के तरफ आकर्षित करना जरूरी था। आगे उन्होंने सारे बच्चों को कार्यक्रम सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया। उसके बाद पुरस्कार वितरण छाया प्रवीण के द्वारा किया गया जिसमें आशिष  कुमार एंव अतुल सागर भी शामिल थे। इस तरह यह कार्यक्रम बडे आनंद के साथ-साथ समापन हो गया।