ए.डब्ल्यू.आई.सी के वार्षिक समारोह  में बच्चों  ने पुरस्कारों की फुलझड़ी लगायी

बारिश कि बुदों के साथ ही हम लोग 18 जुलाई 2019 को सुबह 9:30 बजे गांधी पीस फाउन्डेशन की ओर रवाना हुये जिसमें मैं आशिष कुमार, बॉबी नायक 10 बच्चे  शामिल थे, जो सातवी व आठवी कक्षा के थे। सारे बच्चों को वहां प्रतियोगिता में भाग लेना था। प्रतियोगिता में चित्र  देखकर कहानी बनाना, मुहावारों का अर्थ बताकर वाक्य में प्रयोग करना, हास्य कथा प्रतियोगिता एवं संख्या द्वारा चित्र  बनाना आदि थे।ए.डब्ल्यू.आई.सी के वार्षिक समारोह

गांधी पीस फाउन्डेशन में ए.डब्लू.आई.सी. का वार्षिक समारोह का आयोजन किया गया था। जिसमें  बच्चों का  मनोबल बढ़ाने एवं कार्यक्रम को रोचक बनाने के उद्देश्य से मुख्य अतिथि के रूप में डा.मधुपंत जी आई हुई थीं जिन्होंने बच्चों के सामने विभिन्न प्रकार की हास्यास्पद कविताऐं पेश की। साथ में बच्चों को विभिन्न प्रकार की  किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित किया। साथ ही कार्यक्रम मे कार्यकर्ता के रूप में मनोरमा जफ़र, सावित्रि सिंह, एवं प्रतिभा मंजूदा शामिल थी। कार्यक्रम में जयंशकर मेमोरियल सेंटर के अलावा और भी कई संस्था के बच्चे शामिल थे जिसमें मुख्यताः प्रयत्न, असीम, बालिका ट्रस्ट एंव अमर ज्योति के बच्चे शामिल थे।    

प्रतियोगिता का शुभारंभ 10:30 बजे किया गया। सभी प्रतियोगिताओं का आयोजन बारी-बारी से किया गया। सभी  प्रतियोगिताओं में हमारे जे.एम.सी. के सभी बच्चों ने  बहुत ही जोश तथा हर्षोल्लास के साथ भाग लिया और पुरस्कार भी जीते चाहे वो चित्र  देखकर कहानी बनाना हो या संख्या से चित्र  बनाना हो। सभी में बाजी मार ली।ए.डब्ल्यू.आई.सी के वार्षिक समारोह    

मुहावरे में सभी अचंबित हो गये जब उत्तर देने वाले पूरे बच्चों में से आधे बच्चे पूरे संस्थाओं के और बाकी आधे सिर्फ जे.एम.सी. के थे। इससे भी आश्चर्यजनक तब लगा जब बारी आई हास्यस्पद कथा की क्योकि इस प्रतियोगिता के आरंभ से लेकर अंत तक कार्यक्रम में सिर्फ जे.एम.सी. के बच्चों की आवाज़े गूंज रही थी।  इन सब के बीच में तालियों की गड़गडाहट गूंज उठी जब जे.एम.सी. की अंजली सक्सेना ने एक मुहावरे का इतना सटीक एंवम स्पष्ट उत्तर दिया कि ऐसा लगा जैसे तीर का जबाव ब्रह्मास्त्र से दिया गया हो।

इस प्रकार कार्यक्रम में प्रतियोगिता का अंत हुआ और प्रांरभ हुआ पुरस्कार वितरण का जिसमें जे.एम.सी. के बच्चों ने एक बार फिर बाजी मारी और कुल सात पुरस्कार जीते। जिनमें अंजली सक्सेना अकेली तीन पुरस्कारों की हकदार बनी और बाकी चार अनन्दिता, शीतल, तनीशा  एंवम सुहानी ने हासिल किये।

उसके बाद हम लोग शहीद पार्क का भम्रण करने चल पडे़ अपने जे.एम.सी की ओर जहां अन्य साथी उनका बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे।