जे.एम.सी. में निराशा पर साहस की जीत

13 जुलाई 2019 को जयशंकर मेमोरियल सेंटर के प्रांगण में एक तरफ मिलन तो दूसरी तरफ जुदाई कुछ इस तरह का ही माहौल देखने को मिला। एक तरफ जहां दसवीं व बारहवीं पास बच्चे और नौवीं, दसवीं में पढ़ रहे बच्चे एक दूसरे से मिलकर अपना अनुभव और खुशी बांट रहे थे वहीं दूसरी तरफ कुछ बच्चों को जे.एम.सी. से अलग होने का दुख भी हो रहा था।जे.एम.सी. में निराशा पर साहस की जीत

इस मिलन समारोह का आयोजन 9वीं व 10वीं में पढ़ रहे बच्चों के द्वारा 10वीं व 12वीं पास बच्चों के लिए किया गया था।  कार्यक्र्रम की शुरुआत पांच दिन से हो रही तैयारी को पूर्ण विराम देते हुए 13 जुलाई दोपहर 3 बजे से शुरु की गई।  रिमेडियल एजुकेशन् के शिक्षक अतुल सागर ने कार्यक्रम की शुरुआत सभी का स्वागत करते हुए किये और साथ में सभी दसवीं व बारहवीं उत्तीर्ण बच्चों को उनकी सफलता के लिये बधाई भी दिये।   

इसके बाद एक मजेदार खेल खिलाया गया। सभी उत्तीर्ण बच्चों को एक-एक बैलून देकर उन्हे कहा गया कि वह उसे फुलाये और उसे अपना भविष्य समझकर आनेवाले सभी बाधाओं से बचाना है। वर्तमान के नौवीं व दसवीं के बच्चों से बैलून को बचाना था जो कि एक बाधा के रूप में सामने तैयार खडे थे।  

​​जे.एम.सी. में निराशा पर साहस की जीत जैसे ही खेल की शुरुआत हुई कई सारे बैलून फूटने लगे उसके कारण बिलकुल दिवाली जैसे  खुशी का माहौल बन गया  था और सभी बच्चों के हंसने की आवाज के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। इस खेल के तुरंत बाद सभी उत्तीर्ण बच्चों को सामने बुलाया गया और उमा मेडम के हाथों से उन सभी को रंगीबिरंगी ग्रीटिंग कार्ड जो जे.एम.सी. के बच्चों ने बनाया था उन ग्रीटिंग्स को दिया गया। सभी उत्तीर्ण बच्चों ने एक-एक कर  जे.एम.सी.  के साथ अपना अनुभव तथा भविष्य योजना के बारे में बताया।

पुष्पा-जब मै जे.एम.सी.  में आयी थी तो मुझे कुछ भी नहीं आता था। अतुल सर ने मुझे बेसिक से पढाना शुरु किया। पहली बार मैं 9वीं में कम्पार्टमेंट आयी लेकिन अतुल सर ने मुझे हिम्मत दी और दुबारा 9वीं में पढ़ाई कर पास किया और अभी 12वीं भी पास कर लिया।   

अफसाना- मै जब जे.एम.सी. में आई मुझे हिन्दी पढ़ना या लिखना भी नहीं आता था  धीरे-धीरे गुड्डी दीदी और बॉबी दीदी ने बहुत मदद किया, जिससे मैने हिन्दी बोलना लिखना सीख लिया। ​​जे.एम.सी. में निराशा पर साहस की जीत

सुमन - मैं हमेशा डरी-सहमी रहती थी। मै कभी स्टेज पर खड़ी नहीं होती थी। हमेशा मैम के पीछे छिपी रहती थी आज मै सर और छाया मैम की वजह से यहां आप सब के सामने खडे होकर बोल पा रही हूं। शुरु में सर ने मेरा टेस्ट लिया जिसमें मेरा नम्बर जीरो आया था।  उसके बाद सर की मेहनत से आज मै 10वीं मे आ पहुंची हूं। मुझे कभी उम्मीद नहीं थी कि मैं 9वीं पास कर पाउंगी पर अतुल सर की मेहनत से आज मै 10वीं का बोर्ड परीक्षा दे पाई।  

सज्जन - मै जे.एम.सी. में 9वीं के तीसरे साल में आया था। दो साल पहले मैं कहीं ओर ट्यूशन जाता था और  दो बार फेल होता गया। हर साल मै इतिहास मे फेल हो रहा था। लेकिन यहां सर के बदौलत 10वीं कक्षा में इतिहास के विषय में 86 प्रतिशत से पास हो पाया।  

नरेश- मै गणित मे बहुत कमजोर था। अतुल सर ने गणित विषय में बेसिक से मुझे पढ़ाया और आज मै 12वीं तक पहुंच पाया हूं।  जे.एम.सी. में निराशा पर साहस की जीत

चंदा-मै जब दिल्ली में आई थी, तो मुझे ठीक से बोलना भी नहीं आता था। तब मुझे ज्योती दीदी उसके बाद अर्चना दीदी ने पढाया। पर जब जे.एम.सी. में आयी तो यहां सब ने मेरी बहुत सहायता कि और मेरे अंदर का डर धीरे-धीरे खत्म हो गया। अब मै 12वीं पास कर चुकी हूं और आगे लैब टेक्निशियन बनना चाहती हूं।

रोहित- मै शुरु में गणित मे बहुत कमज़ोर था। 9वी मे मेरा कम्पार्टमेंट भी आया। सर ने मुझे दुबारा शुरु से 9वीं  पढ़ाया और फिर उसके बाद आज तक दुबारा फेल नहीं हुआ और आज मैं 12वीं भी पास हो गया हूं। अभी मैंने रेग्युलर कॉलेज के लिए फॉर्म भरा है।

मध्यांतर में उमा मैम ने सभी को बधाई देते हुए सम्बोधित किया और कहा कि मुझे बहुत खुशी  है कि जे.एम.सी. में  काम कर रहे सभी शिक्षक की मेहनत रंग लायी  है। बच्चों के कौशल उनकी मेहनत को देखकर और उनकी बातों को सुनकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। बच्चों को खुद परिवार के प्रति समर्पण के साथ-साथ समाज के प्रति भी उत्तरदायी  होनी चाहिए। इन वक्तव्यों के साथ उन्होने बच्चों का मार्गदर्शन किया।जे.एम.सी. में निराशा पर साहस की जीत  

फिर मंच संचालन की जिम्मेदारी 10वी के अंजली और कुंती ने लेते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। शुरूआत 9वीं के बच्चों के द्वारा बनाए गए एक नाटक के द्वारा हुआ। फिर तो सिलसिला ही चल पडा रंगारंग कार्यक्रमों का। एक ओर बच्चो की अद्भूत कला का प्रदर्शन हो रहा था तो दूसरी तरफ  तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा माहौल गुंजायमान हो रहा था। कार्यक्रम में मुख्यतः बच्चों के द्वारा दो नाटक किए गए, जो क्रमशः ”बच्चों को मिला सबक”और  विषय पर आधारित थे। 10वीं के बच्चों में एक जोरदार गीत ” शेर आया शेर” द्वारा गाकर लोगो में जोश भर दिया।

कार्यक्रम के अंत में छाया रामटेके ने भी बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि सबसे पहले जे.एम.सी. के तरफ से सभी उत्तीर्ण बच्चों को उनके सफलता के लिये और उज्वल भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं देती हूं। इन बच्चों के सफलता के पीछे सभी शिक्षको की मेहनत भी है इसलिये उन्होने सभी शिक्षकों की सराहना भी की। यह भी बताया कि - ”इस सेंटर के शुरूआती दौर में हमारे पास बहुत कम बच्चे होते थे धीरे-धीरे बच्चे बढते गये और आज एक साथ इतने बच्चों को देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। साथ में यह भी समझ में आ रहा है कि बच्चों के प्रगति के साथ-साथ जे.एम.सी. की भी प्रगति हुई है और हम सब बहुत खुश है उसको देखकर। सभी बच्चों एवं शिक्षकों के सफलता के लिये जोरदार तालीयों की गडगडाहट सुनायी गयी अब हम अंतिम पडाव में पहुंच गये थे और अंत में नौवीं के बच्चों ने ’अपना टाइम आयेगा-अपना टाइम आयेगा’इस रैप गाने के साथ कार्यक्रम का समापन किया  गया।