सीखने और सीखाने का नमूना

 

सीखने और सीखाने का नमूना 29, जून 2019 को जयशंकर मेमोरियल सेंटर में त्योहारो का माहौल था। दस दिवसीय ग्रीष्मकालीन शिविर का  समापन कुछ रंगारंग कार्यक्रम के साथ होना था। बच्चो में उत्साह और आनन्द की कोई सीमा नहीं थी। हर कोई अपने अन्दर का कलाकार और जो भी उसने सीखा इन दस दिनो में उसे बाहर करने के लिए बेचैन थे।

कार्यक्रम के दिन 3 बजे से ही जे.एम.सी. तथा न्यूकॉनसेप्ट से जुड़े अनेक सदस्य तथा कुछ अतिथिगण बच्चो के आत्मविश्वास को बढ़ाने आए हुये थे। मंच को भांति-भांति के फूलों से सजाया गया था और बच्चे भी खुद संवर कर आए थे। कार्यक्रम की शुरूआत रिमेडियल के शिक्षक अतुल सागर ने अतिथियों तथा बच्चों का स्वागत करते हुए की।  उन्होंने बताया कि किस प्रकार हर वर्ष इस तरह के शिविर चलाए जाते है ताकि बच्चो का बौद्धिक, कला, साहित्य और समाजिक विकास हो सके।  

फिर सिलसिला चला बच्चों ने खुद से जो अनेक कविताएं बना रखी थी उन्हें अपनी प्यारी से जुबानसी जब उन्होंने लोगो के समक्ष रखा तो तालियों की गडगडाहट गुंज पड़ी। मां के अस्तित्व और समाज की कुरितियां के साथ-साथ अनेक विषयोँ पर उन्होने कविताएं सुनाई। कुछ बच्चो ने जे.एम.सी. के मूल्य तथा लोगो की उसके प्रति अलग-अलग सोच को मुद्दा बनाते हुए नाटक प्रस्तुत किया। वहीं दूसरी ओर बड़े बच्चो ने भी अंग्रेजी तथा हिन्दी गानो की लड़ी लगा दी।

सीखने और सीखाने का नमूना विभिन्न समूहो ने अलग-अलग गाने प्रस्तुत किए। रिश्ता, फैशन, असुरक्षा, लुभावना आदि विषयोँ को लेकर उन्होने एक सुन्दर सा नाटक प्रस्तुत किया। जिसे देख बड़े लोग भी सोचने पर मजबूर हो गए की बच्चो के साथ क्या-क्या  समस्याएं होती है। बीट बॉक्सिंग का संगीत के साथ अद्भुत ताल-मेल को दिखाते हुए कुंती और अंजली ने लोगो को सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या ऐसा भी होता है। छाया रामटेके ने बच्चों और शिक्षकों के कार्यक्रम की सराहना करते हुए गी्रष्मकालीन शिविर के बारे में लोगो को बताया कि इतनी गर्मी में अपने सभी शिक्षक गण व इंटर्न्स ने बडी  मेहनत और लगन से इस शिविर को चलाने में बहुत मेहनत  की और कैसे सभी बच्चों को उनकी ही रुचि के अनुसार सिखाया जाये उस पर जोर देते हुए इस शिविर को चलाया।

 

 

तथा बच्चो को मेहनत और लगन से आगे बढ़ने की सलाह दी कार्यक्रम का समापन शिक्षक आशिष ने मार्गदर्शक  दोहे : धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होये। माली सींचे सौ घड़ा ऋतु आये फल होये।। सारे काम धीरे धीरे होता है यदी माली एक ही दिन पेड में सौ घड़ा पानी डाल दे फिर भी फल ऋतु आने पर भी आयेगा, से की तथा सभी को उसका मतलब बताते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और इसी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।