बच्चों की हुनर की बरसात

बारिश का पानी।

JMC-Summer Camp 2019 - Children Drawingबारिश का मौसम आया। 
रंग सुनहरे लाया। 
झमझम-झमझम पानी बरसे। 
साथ में बिजली भी चमके।। 

ऐसी सुंदर सी कविता बच्चो ने खुद जे.एम.सी. के प्रांगण में चलने वाले ग्रीष्मकालीन शिविर में ही बना सकते हैं जो हम सोच भी नही सकते थे।

ज्येष्ठ मास की कड़कती धूप और गर्म हवाएं किसी को भी घर पर बैठने को मजबूर कर दे और शायद इसीलिए स्कूलो में बच्चो की छुट्ठीयां भी हो जाती है। पर बच्चे थे कि वो बन्द कमरे में अपनी छुट्टीयां नहीं गुजार सकते थे ना ही इतनी भीषण गर्मी में बाहर खेल या घूम सकते थे। इसीलिए कैसे बच्चों के सोच को पंख देकर आसमान में उड़ान भरने के लिये प्रेरित करे इस मुहिम को सफल बनाने के लिए जे.एम.सी. के सारे कार्यकर्ता बड़े जोर- शोर के साथ कार्य में लग गए। इस कार्य में हाथ बटाने के लिये दो इंटर्न्स रोहिल और आदित्य भी शामिल थे।

बच्चों की हुनर की बरसातइस ग्रीष्मकालीन शिविर में वर्ग चौथी से दसवी तक के बच्चो के लिये दस दिवसीय  शिविर का आयोजन किया गया। जिसके तहत अनेक प्रकार के बच्चो से सम्बंधित तथा रोचक विषयों का संकलन था। इस भीषण गर्मी में इस शिविर को किस तरह रोचक बनायें यह सभी शिक्षकों के सामने चुनौती थी। इसी चुनौती को देखते हुए सभी ने सोचा कि इस शिविर को तीन भागों में बांटा जाये पहला चौथी से छठीं कक्षा तक एक समूह, सातवी एवं आठवी कक्षा एक समूह और नौवी एवं दसवी कक्षा के बच्चो को एक समूह में बांटा गया।  

इस प्रकार सूरज की तपती धूप एवं बच्चों के ग्रीष्मकालीन शिविर का शुभारंभ किया गया। यह शिविर 17 जून से 28 जून तक कुल 9 दिन चला जिसमें उन्होने बहुत ही उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ भाग लिया। इस 9 दिन के अंतराल  में कला का उजागर हुआ चाहे वो छोटे बच्चों के मिट्टी से बर्तन बनाने का हो या सातवीं व आठवीं के बच्चों के कविता लिखने का हो।

इस शिविर में छोटे बच्चों के लिए मुख्यतः अक्षरों से संबंधित क्रियाकलाप करवाए गए जैसे कि अक्षरों पर आधारित चित्रकला, अक्षरों से शब्द एवं कविता का निर्माण करना इत्यादि। अक्षरों से संबंधित क्रियाकलाप का मुख्य उद्देश्य  बच्चो को मनोरंजन के साथ-साथ उनके हिन्दी पढ़ने व लिखने का स्तर भी सही करना था।

बच्चों की हुनर की बरसातशिविर में सातवीं व आठवीं के बच्चो को मुख्यतः अक्षरों से शब्द बनाना, शब्द से कहानी लिखना एवं कहानी से    संबंधित चित्रकला करना था। आर्ट एण्ड क्राफ्ट में बच्चों ने विभिन्न प्रकार की कला का अद्भुत उदाहरण पेश किया जिसमें मुख्यतः थर्माकॉल से जे.एम.सी. की बिल्डिंग, पर्स, मछली, घर, इत्यादि शामिल था। शिविर के दौरान ही  मनोरंजक एवं ज्ञानवर्धक फिल्म भी दिखायि गयी जिसमें उनको सीख मिली की न तो हमे किसी और को कमजोर समझना चाहिए और न खुद को किसी से कमजोर समझना चाहिए।

सारे बच्चो ने शिविर के दौरान ही एक दिन बेहतरीन मिसाल पेश की। उसमें चाहे छोटे बच्चों ने मिट्टी से विभिन्न   प्रकार की सामग्री का निर्माण किए जिसमें मुख्यतः गेंद, बल्ला, घर, चुल्हा इत्यादी शामिल हैं और सातवीं व आठवीं  के बच्चों ने खुद सोच-सोचके बेहतरीन कविता कि रचना की जिसमें मुख्यतः बारिश का पानी एवं मां मै तेरा बेटा हूं  शामिल था। कविता ऐसी की छोटे तो छोटे बडे़ भी पढ़कर मात खा जाएं कि कविता स्वयं दिनकर जी के द्वारा लिखी  गई हों। इन्ही सभी क्रिया कलापों के साथ यह ग्रीष्मकालीन कैंप अपने समापन की ओर बढ़ा और कला प्रदर्शन के सिलसिले का प्रारंभ हुआ जो 29 जून को रखा गया था।

इस समर कैंप में पहले दिन से आखरी दिन तक सारे बच्चों के अंदर एक अलग तरह की उमंग देखने को मिली। यह समर कैंप हिन्दी विषय के इर्द-गिर्द रचाया गया था। इस बार बच्चों को कुछ हिन्दी स्वर-व्यजंन दिये गए और कहा गया कि इनसे कुछ शब्द बनाये और उन्ही शब्दों पर आधारित चित्र बनाये। किसी दिन बच्चों ने कहानी बनायें तो किसी दिन कविता और नाटक भी बनाये गये।  

बच्चों की हुनर की बरसातबच्चो ने इस समर कैंप में थर्मोकोल से घर, जे.एम.सी. अलग-अलग चेहरा, आकर्षक दृष्य बनाया तो दूसरी तरफ मिट्टी के जैसे बर्तन, चूल्हा, पेड, फूल, इंसान, केक, पतीला, इत्यादि बनाये। कभी खेल पर बातचीत की गई तो कभी फिल्म दिखाया गया।

दूसरी तरफ बडे बच्चों में नौवी व दसवीं के लिये हर विषय पर दो दिन निर्धारित किए गए और कुल पांच विषयों का संकलन था। इन्ही बच्चों से संबंधित उन सभी विषयों को शामिल किया गया था जो अभी उन पर हावी है। यह षिविर रोज दोपहर में 2.30 बजे से षाम 5 बजे तक आयोजित किया जाता था। तथा सुबह बच्चे पिआनो सीखने आते थे। 

इस शिविर के आरंभ से ही बडे बच्चो में भी अंग्रेजी में बोलचाल, बीटबॉक्सिंग तथा पिआनो की क्लासेस् दी जा रही थी। जिससे बच्चे बहुत कुछ सीख भी रहे थे यह सब जो बाहर से इंटर्न्स आये थे उनके साथ हो रहा था।

शुरूआत का विषय था सुरक्षा-असुरक्षा और फैशन् जिसके अन्तर्गत हर किसी की सुरक्षा हमारा मुद्दा था। कहां एवं किससे बच्चे खुद को असुरक्षित महसूस करते है और ऐसी स्थिती मे वो क्या करते है या उन्हें क्या करना चाहिए इन्हीं सब विषयों पर चर्चा हुई। दूसरे दिन भी फैशन से सम्बन्धित असुरक्षा भाव और प्रतिबंधन पर चर्चा हुई। हर प्रकार से आगे भी अनेक विषयों पर चर्चाएं होती रहीं। जैसे रिश्ते, लुभावना व आकर्षण, कैरियर, स्वास्थ्य और पोषण जैसे अनेक विषयों पर चर्चाएं होती रही।

रिश्ता विषय में बच्चों ने अनेक नाटक और चर्चा के द्वारा बताया कि किस प्रकार रिश्ता उनके लिए महत्वपूर्ण है चाहे वह मां-बाप का हो या भाई-बहन या दोस्त का।  इसके अलावा अन्य रिश्तों में भी विश्वास, आदर, देखभाल और अन्य भाव या गुण होने चाहिए तथा क्या नहीं होना चाहिए आदि विषयो पर चर्चा हुई।

बच्चों की हुनर की बरसातलुभावना विषय पर भी आजकल बच्चो में चल रहे नशा में सिगरेट, गुटका, तम्बाकु और शराब या फिर सोशल नेटवर्किंग तथा इसी प्रकार की बहुत सारी आदतें जो बच्चो को आगे बढ़ने में रूकावटे डाल रही है। इसके अलावा इसी उम्र में लडका और लडकी एक-दूसरे के लुभावनेपन में अपना भविष्य बर्बाद होने के कारणो पर चर्चा हुई। किस प्रकार से उनकी नज़र में ये गलत है और उससे बचने के लिए वो क्या करते है उन्होंने बताया।

स्वास्थ्य और पोषण के अंतर्गत भी उन्होंने अपने दैनिक जीवन से सम्बधित समस्याओं को रखा। किस प्रकार से उन्हें पूर्ण पोषण नहीं मिल पाता या कैसे कुछ जगहों पर खाने में उनके साथ भेद-भाव किया जाता है। इन सारे विषयों पर चर्चा की गई। फिर उन्हें बताया गया कि कैसे वो साधारण और न्यूनतम खर्च में पौष्टिक खाने से पोषण प्राप्त कर सकते हैं या किन चीजों से उन्हें दूर रहना चाहिए आदि।

अंतिम और सबसे महत्पूर्ण विषय था जिविका मार्गदर्शन कार्यशाला। जिसमे जहां हमारे शिक्षक ने बच्चों को उनकी पसन्द के अनुसार जिविका मार्गदर्शन सम्बधि सलाह दी वही बाहर से आये इंटर्न्स ने भी उनका मार्गदर्शन किया। कुछ  लोग इस विषय के लिए बाहर से आए जैसे एन.आई.आई.टी. फाउंडेषन् से कम्पयूटर से संबंधित जिविका मार्गदर्शन के बारे में बताने कुछ लोग आए तो अनुराग ने डिजाइन और आर्ट्स के बारे में बहुत कुछ बताया साथ ही  इन्होने इसमे भविष्य के अवसर पर बच्चो को सलाह दी। कार्यक्रम में जहां सोच का आदान-प्रदान हुआ वहीं बच्चों ने वीटबॉक्सिंग जैसी अनोखी चीज़ भी सीखी। हर विषय पर नाटक, चर्चा तथा विडियो द्वारा अपनी सोच व्यक्त की गई। इस पूरे कार्यक्रम को बच्चों ने खूब लगन और आनंद के साथ किया और आगे भी इसी तरह का कार्यक्रम करने की मांग रखी।