अ आ इ ई हिन्दी हमने सीख ली

हमारे पास तीसरी कक्षा से छठी कक्षा तक बच्चे पढ़ने आते है जिसमें कुछ बच्चे पढ़ने लिखने में बहुत कमजोर है क्योंकि उन बच्चो को घरों में भी पढ़ने की मदद नहीं मिलती है। उनके माता-पिता काम पर जाते है तो बच्चों को समय नहीं दे पाते है । माता-पिता भी इतने पढ़े-लिखे नहीं होते हैं कि अपने बच्चों को खुद पढ़ा सके। उनके घर का या घर के आस पास का माहौल भी वैसा नहीं होता है कि बच्चे की पढ़ाई में रूचि रहे। ये हमारे पास आते तो है पढ़ने के लिए लेकिन उनको पढ़ने में अच्छा नहीं लगता है। और उनको पढ़ना सिखाना हमारे लिए एक चुनौती पूर्ण काम है। इन बच्चों को पढ़ाने में हम लोगो को भी थोडी परेशानी आती है क्योंकि जो बच्चे पढ़ने में ठीक है उनको तो जल्दी समझ में आ जाता है और जो बच्चे कमजोर है उनको बार-बार समझाने पर भी  ठीक से समझ में नहीं आता है। इसलिए  हमने सोचा कि क्यों ना इन बच्चों को एक अलग तरीके से खेल खेल में पढ़ना सिखाया जाए । जिससे कि इनकी पढ़ाई में रूचि बढ़े।

Activityइसीलिए सर्दियों की छुटिट्यों में हम लोगों ने एक कैंप रखने का सोचा और उसमें उन्हीं बच्चों को लिया जाए जिनको हिन्दी पढ़ना और वर्णो का भी ज्ञान नहीं है इसलिए हिन्दी नहीं पढ़ने आने की वजह से वह अपनी कक्षा के और विषय की किताबें जैसे विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, गणित आदि को पढ़ पाने में अक्षम होते है हमने यह भी सोचा कि बच्चों को कापी किताब से नहीं पढ़ाएंगे।

हमने 2 जनवरी 2019 से कैंप शुरू किया। जिसमें लगभग 22 बच्चे थे। बच्चों को दो बार बुलाया सुबह 10 से 12 बजे और फिर 2ः30 से 5ः00 बजे तक।

2 जनवरी को सबसे पहले बच्चो ने एक दूसरे को अपना परिचय दिया क्योंकि हमारे पास लड़के सुबह पढ़ने आते है और लडकियां शाम को पढ़ने आती है। तो सभी एक दूसरे को नहीं जानते थे। और कैंप में लड़का , लडकी दोनो ही थे। उनको विडियो दिखाया जो कि अ से अः तक पर एक गीत था । बच्चो ने भी साथ में तेज आवाज़ में गाया  और उनको बहुत मज़ा भी आया ।

Activityपरिचय देने से पहले हमने बच्चों की हाज़री एक नये तरीके से ली जिसमें हमको कुछ नहीं करना था। बच्चों को खुद ही सब कुछ लिखना था। हम ने हर बच्चे को एक कार्ड दिया उसमें एक फारमेट बनाया था उसमें बच्चों को अपनी हाजरी खुद लगानी थी और अपनी हाजरी कार्ड खुद चिपकाए और उसमें हर रोज़ अपनी हाज़री खुद लगाते थे। अगले दिन हमने एक विडियो क से ज्ञ तक के वर्णे चित्र के साथ थे और साथ में गीत भी गाया जा रहा था। उसके बाद बच्चों ने खुद से भी वो गीत गाकर सुनाया।  

बच्चों को अ से ज्ञ तक सिखाने के बाद सभी बच्चों ने मिलकर एक पेड़ बनाया। पेड़ पर स्वर और व्यंजन पत्तियों पर लिखकर पेड़ पर चिपकाया जिसको हमने वर्णो का पेड़ कहा।

दुर्गेश ने कहा कि मुझे पेड़ बनाना सबसे अच्छा लगा क्योंकि पहले कभी भी ऐसा नही सीखा था।

फिर दो अ़क्षरों के बिना मात्रा के शब्द की भी एक विडियो दिखाई जैसे टब, रथ, जल। बच्चें भी साथ -साथ बोलने की कोशिश कर रहे थे । अगले दिन उन्हीं शब्दों का एक रंगबिरंगा चार्ट बनाया। इसी तरह से तीन और चार अक्षरोंवाले   बिना मात्रा वाले शब्द भी पढ़ने सीखे और सभी बच्चों को एक-एक कार्ड दिया बच्चों ने तीन और चार अक्षरों वाले शब्द बनाकर दिखाए उसमें सभी बच्चों का ठीक नहीं था कुछ ही बच्चों का ठीक था। जिन बच्चों का ठीक नही था उन बच्चों को फिर से दोपहर के समय तीन और चार अक्षरों वाले शब्द सिखाए। 

Activityअगले दिन उसके बाद बारहखड़ी की भी विडियो दिखाई बच्चों ने उसको बोलने की कोशिश की। पहले दिन सिर्फ  क,ख,ग,घ, तक ही कराई क्योंकि एक साथ नहीं सीख पाएंगे। तीन दिनों तक बारहखड़ी कराया उसके बाद एक क्रियाकलाप कराई जिसमें बारहखडी़ की एक माला बनाई।

एक रस्सी, टेप और पत्तियों की तरह कार्ड पर कटिंग करके रंगबिरंगे पेन से बारहखड़ी लिखी। अब एक -एक बच्चे को  एक-एक पत्तियों उठाकर रस्सी में लगाना था जिससे कि एक माला बन गई। क,का,कि,की,कु,कू, इस तरह से बच्चों के द्वारा एक माला बनाई गई। बच्चों ने यह क्रियाकलाप करने में अपनी अपनी रूचि दिखाई। अगले दिन शब्दों का एक गेम खिलाया जिसमें वर्णो के पांच कार्ड बनाकर दिवार पर लगाए। चार कार्ड पर एक-एक वर्ण लिखकर दिवार पर चिपकाया था। बच्चों के दो समूह बनाए जिसमें एक समूह का नाम सेब था दूसरे समूह नाम का संतरा था। दोनो समूह  में से एक-एक बच्चा एक साथ खडे़ होंगे और हम कोई भी एक शब्द बोलेंगे वह शब्द जिस वर्ण से शुरू होता है उसी वर्ण पर जो सबसे पहले हाथ रखेगा उसी समूह के अंक सबसे ज्यादा होंगे और वही समूह विजेता होगा।   

सभी बच्चों ने कहा कि हमें यह गेम खेलने में बहुत मजा आया और सभी बहुत खुश भी थे।  

बच्चों ने बारहखड़ी का भी एक पेड़ बनाया। अपने-अपने नाम का पहला अक्षर क्या है सभी बच्चों ने बताया। यह सब हम ने बच्चों को इसलिए करवाया ताकि बच्चों को वर्णो और मात्राओं का ज्ञान हो जाए । और वो भी बाकी बच्चों की तरह पढ़ना सीख जाएं । इस कैंप को करने से सभी बच्चों को सब कुछ तो नहीं आया पर उनके अंदर पढने की एक रुचि पैदा हुई जो कि हम लोगों को देखने को मिला। पहले वहीं बच्चे पढ़ने के नाम से सबसे पीछे जाकर बैठते थे या फिर कुछ बहाना लगाते थे और पढ़ने से डरते थे क्योंकि उनको ऐसा लगता था कि हमको पढ़ना नहीं आता है और सबके सामने हम गलत पढेंगे तो बाकी बच्चे हमारा मजा़क बनायेंगे। लेकिन इस कैंप के बाद वही बच्चे किताब पढ़ते समय खुद बोलते है कि मैम हम पढ़ेगें, अभी मैनें नहीं पढ़ा, इसने ज्यादा पेज़ पढ़ा, मैंने अभी उसके बराबर नहीं पढ़ा, मुझसे भी पढ़वाओ तो बच्चों के अंदर पढ़ने का उत्साह आना ही सबसे पहली और सबसे बड़ी बात होती है। सभी बच्चे अभी ठीक से पढ़ नहीं पाते है लेकिन कोशिश बहुत ज्यादा करने लगे है। यह देखकर हमको बहुत खुशि हुई। 

Closing ceremonyमोनी- मेरा नाम मोनी है। मै चैथी कक्षा में पढती हं। मैने दो और तीन अक्षरो वाले षब्द भी सीखे।   शिवम - नमस्ते! मैने अ आ इ ई और बाराखडी और मात्राएं सीखा। सब कुछ सीखा।  आशिश- मैने शब्द बनाना सीखा। गोविंद - मेरा नाम गोविंद है, मै 6ठी कक्षा में पढता हंू  मैने बाराखडी सीखा और मुझे यह कमरा भी सही लगा। पढाई मे मुझे अक्षरों पर हाथ लगाकर पहचान ने वाला गेम अच्छा लगा और डान्स भी अच्छा लगा।  

दुर्गेश - मेरा नाम दुर्गेश है। मै 4थी कक्षा में पढता हंू इधर आकर मुझे बहुत अच्छा लगा। मैने दो, तीन और चार अक्षरोवाले शब्द सीखे और मात्राऐ भी सीखे। मुझे अक्षरों से पेड बनाना अच्छा लगा। स्वर और मात्राओं का माला बनाना भी अच्छा लगा।   

किशन - मेरा नाम किशन है मैं पांचवी कक्षा में पढ़ता हूं। मैने अ से ज्ञ तक और बाराखड़ी सीखा। मुझे सभी दिन बहुत मजा आया। मैने दो अक्षरों वाले शब्द भी सीखे और मुझे डांस बहुत अच्छा लगा। ललित- मेरा नाम ललित है मै चैथी कक्षा में पढ़ता हूं  मैने बारहखड़ी सीखी और हिन्दी पढ़ना सीखा। और अतुल सर ने जो मात्रा वाले शब्द पढ़ाए वो अच्छा लगा। 

इसी तरह मोÛ हारिष, रवि, ललित और कशिश ने कहा कि बारहखडी सीखा, दो अक्षरवालों के शब्द सीखे और कशिश ने कहा  मै विंटर कैंप में रोज आती थी। मुझे बारहखड़ी पढ़ने आने लगा है मैने शब्द बनाना सीखा। मुझे बाराखड़ी पढ़ने में सबसे अच्छा लगा। मैने दो और तीन अक्षरों वाले शब्द सीखे। इसी तरह हर बच्चा पूरी तरह से न सीखा हो पर पर जितना सीखा उससे काफी खुश थे।