अंतर्राष्ट्रीय दृष्टी दिवस

’रोशन हो सके किसी का जंहा ऐसी लौ जला दो, जाते-जाते अपनी आंखो को किसी का सूरज बना दो’ ऐसे लिखनेवाली जयशंकर  मेमोरियल सेंटर की छात्रा श्रीना के साथ सभी छात्र व छात्राएं ’अंतर्राष्ट्रीय दॄष्टि दिवस’ के अवसर पर अपनी उत्कृष्ट चित्रकला का  प्रदर्शन किया। सभी बच्चो ने नेत्रदान व आंखो की सुरक्षा को लेकर अधिक से अधिक जागरूक करनेवाली जानकारी को प्रस्तुत किया। 11 अक्तूबर के दिन जयशंकर मेमोरियल सेंटर में ’अंतर्राष्ट्रीय दृष्टी दिवस’ के अवसर पर एक स्पर्धा आयोजित किया गया। जिसके अंतर्गत वर्ग 4थी से 10वी तक के छात्रों ने बढ चढकर हिस्सा लिया। आंखो की सुरक्षा व देखभाल तथा नेत्रदान इस स्पर्धा का मुख्य विषय था। इस स्पर्धा में श्रीना, लक्ष्मी और ममता को बेहतरीन प्रदर्शन के लिये पुरस्कृत किया गया।

Eye Camp 2018आंख किसी भी व्यक्ती के शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है। और अगर वही नही है तो व्यक्ति का जीवन किसी काम का नही। ऐसे लोगो की मदद के लिये अधिक से अधिक नेत्रदान कराने के लिये आई बैंक और तमाम सामाजिक संस्थाओं की ओर से जागरुकता कार्यक्रम चलाये जाते हैं। इस अभियान के तहत अक्तूबर दूसरे गुरुवार को हर साल विश्व दृष्टी दिवस मनाया जाता है इसका मकसद आंखो की बिमारीयों और समस्याओं को लेकर लोगों को जागरूक करना है।

Eye Camp 2018जयशंकर मेमोरियल सेंटर ने भी इस अभियान के तहत 11 अक्तूबर विश्व दृष्टी दिवस के अवसर पर लाइन्स क्लब इंटरनेशनल फाउंडेशन् के साथ सम्मिलित रूप से एक शिविर का आयोजन किया।

इस प्रकार दोपहर 2 बजे शुरू हुआ कार्यक्रम शाम के 5 बजे तक चलता रहा और कोशिश की गई कि जितने अधिक से अधिक लोगों को इसका इसका लाभ पहुंच सके। और इसके लिये जे.एम.सी. के कार्यकर्ता शिविर लगने के 5-10 दिन से ही घर-धर जाकर लोगो को इस शिविर के बारे में जानकारी देने में लगे थे। कार्यक्रम के दिन जहां जे.एम.सी. के कार्यकर्ता और लाइन्स क्लब से आये सभी लोग कार्यक्रम को सफल करने में लगे थे वही दूसरी ओर जे.एम.सी. के छात्रो ने विभिन्न कार्यो जैसे आनेवाले छात्रों का पंजीकरण करना उन्हें कतारबदद करना और उन्हें जानकारी देने में प्रमुख योगदान रहा।

 

 

Eye Camp 2018इस शिविर में मदनपुर खादर, प्रियांका कैंप, राजस्थानी कैंप, श्रमविहार और सरिता विहार से कुल 125-130 बच्चों ने अपनी आंखो की जांच निशुल्क कराई। इसके लिये जे.एम.सी. के प्रांगण में लाइन्स क्लब द्वारा एक मशीन लाई गई थी जो इस्तेमाल करने में बहुत आसान तथा एक सटीक रिपोर्ट देनेवाली थी। काफी कम समय में अधिक से अधिक बच्चों की जांच कराई गई। बच्चे प्रायः 0-15 साल उम्र के थे, किसी-किसी को पढने में समस्या आ रही थी तो किसी को आंखो में पानी आने की समस्या थी। जांच के दौरान 22 बच्चों के आंखो में समस्या पाई गई। जिनको आगे की इलाज करवाई गई उसमें जिनको दवाई की जरूरत थी दवाई भी दी गई। उनमें से ज्यादातर बच्चे इस समस्या से बिल्कुल अन्जान थे और कभी भी आंखों की जांच नहीं करावाई गई थी।