पुस्तक मेले में कविताओं का मेला

"पिता जीवन है संबल है शक्ति है, पिता सृष्टी के निर्माण के अभिव्यक्ति है", ऐसे माता-पिता पर आधारित कविता जे.एम.सी. के छात्राओं ने कविताओं के मेले में पेश किया तो दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। उन बच्चो के हाथ में तख्तियां थी उन पर माता-पिता लिखा था और उनके चित्र भी बने हुए थे।

Delhi book fair 2018हर साल की तरह इस साल भी 29 अगस्त 2018 को दिल्ली पुस्तक मेला में ’बचपन सोसायटी’ के द्वारा बच्चों के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस बार कार्यक्रम का मुख्य विषय कविताओं के मेला था। जिसमें बच्चों को कविताएं प्रस्तुत करना था। 

कुसुमलता सिंह ने कार्यक्रम की श रुआत की इनके अलावा पौलोमी जिंदल मुख्य अतिथी और षषि जैन, गिरिजा रानी अस्थाना, कृष्ण कुमार, नवीन गुप्ता, प्रतिमा चौहान और डॉ. कौशलेंद्र  ये सभी अतिथि मंच पर उपस्थित थे। सभा में कई सारे संस्थाएं और उनके बच्चे भी आये हुये थे।

कुसुमलता सिंह ने कार्यक्रम की शुरुआत सभी का स्वागत किया और बताया कि उन्हे बहुत ख़ुशी होती है की ऐसे कार्यक्रम को आयोजित करते हुए और बच्चो की हुनर बाहर निकालने व बढाने के लिये हमें अवसर मिलता है साथ ही बच्चो को भी कुछ कर दिखाने और सीखने के लिये मौका मिलता है।

सबसे पहले अंकुर संस्था से आए बच्चो ने ’हम बच्चे हिंदुस्तान के गीत’ पर डांस प्रस्तुत किया। उसके बाद छोटी सी ख़ुशी’ एन.जी.ओ. के बच्चो ने वीर अनेक नाम का कविता पेष की। ’असीम’ एन.जी.ओ. से बच्चों ने मै बेटी हूं, ’ज्ञानदीप’ एन.जी.ओ. से बच्चों ने कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती, एसे एक के बाद एक संस्थाएं अपनी प्रस्तुती करते गये। इन सबके बाद अपने जे.एम.सी. के बच्चो ने माता पिता पर दो कविताये पेश की तो सभी ने उन बच्चो का खूब सराहा व इस तरह हमारे बच्चो ने उस कार्यक्रम में दूसरे स्थान प्राप्त किया।

Delhi book fair 2018- Prize distributionसभी एन.जी.ओ. की कविताओं को पेष करने के बाद कार्यक्रम में आए हुए मुख्य अतिथी ने छोटी सी खुषी एन.जी.ओ. के बच्चों को प्रथम स्थान दिया। उसके उपरांत जे.एम.सी. के सभी बच्चों को मंच पर बुलाया गया और दूसरे स्थान ग्रहण करने पर सभी को सर्टीफिकेट व पुरस्कार से नवाजा गया। सभी के लिए तालियां बजी और फोटो भी खींचें। बचपन सोसायटी की टीम ने सभी एन.जी.ओ. के बच्चों को ’जो हमें याद आते हैं’ किताब का विमोचन किया व उसकी प्रतियां और उपहार सभी बच्चो में वितरित की।

अंत में वहां से निकलकर हम सभी ने पुस्तक मेला घूमा और खूब सारी नई नई किताबें भी देखी। एक छोटी सी दुकान पर कई तरह के चित्रकारी को देखते ही बच्चे थम गये वहां कई तरह के चित्र बने हुए थे उनमें रंग भरना था तो इस कार्यकलाप में सभी बच्चों ने बडी उत्सुकता से भाग लिया। बच्चों के लिये पुस्तक मेला में किताब भी खरीदा गया।