रचनात्मक शिक्षा पद्धति की खोज" -13 व 15 जून 2016

13 व 15 जून 2016 को जयशंकर मेमोरियल सेंटर ने हेमा रामनाथन् के साथ मिलकर शिक्षा एवं शिक्षण पद्वति पर सत्र की श्रृंखला का आयोजन किया। इस वर्कशोप का मुख्य उद्देष्य आजकल चल रहे शिक्षा के स्तर तथा बच्चो के शिक्षा के प्रति मनोवैज्ञानिक जागरूकता को समझना था। इस वर्कषाशोप में जे.एम.सी.  के 9 सदस्य जो कि शिक्षण क्षेत्र से जुडे है वे मौजूद थे। इस वर्कशोप का नेतृत्व हेमा रामनाथन् ने किया जो कि खुद एकशि शिक्षिका रह चुकी है तथा अब शिक्षको को प्रशिक्षण देती है।

Mind Mappingइस ट्रेनिंग के दौरान हेमा रामनाथन् व के सभी टीचर्स के अनुभवो का आदान प्रदान किया।  इसके अलावा हेमाजी ने सीखाने के कई तरीको के बारे में न कि जे.एम.सी. सिर्फ बात किया इसके अलावा इस पर चर्चा भी किया कि शिक्षा क्या है? इसके अलावा शिक्षा का मापदंड व प्रणाली के बारे में भी चर्चा हुई। बच्चो को अपने आप सीखने के लिये क्रियाशील बनाने के बारे में भी बातचीत हुई। इसमें बच्चो को पढाने के क्या-क्या नये तरीके अपना सकते है और चुनौतियों के बारे में भी सवाल-जवाब हुआ। इस ट्रेनिंग का मकसद यह था कि जे.एम.सी. के बच्चों को सिखाने की प्रणाली में सुधार हो और शिक्षा पद्धति सरल व आसान हो।

पहले दिन की शुरुआत में उन्होंने शिक्षा क्या है और शिक्षा क्यों जरूरी है इस प्रष्न पर काफी कुछ कहा एवं सुना। साथ ही उन्होने सभी स्टाफ को दुनिया के कुछ बेहतरीन शिक्षको का विडियो भी दिया जिसमें कि उन शिक्षको द्वारा जिन तरीको को शिक्षा के क्षेत्र में इस्तेमाल किया गया, के बारे में बताया गया। इसके अलावा प्रशिक्षण में मौजूद सभी लोगों ने इस में जमकर भाग लिया साथ-साथ में अनेक सवाल-जवाब किये।

स्कूल क्या नहीं करते हैं जो करना चाहिये।

What schools do not do which they should?

जे.एम.सी. में क्या- क्या होता है? जो सरकारी स्कूलों में नही होता।

What happens in JMC, that does not happen in government schools?

जे.एम.सी.में ऐसा क्या नही होना चाहिए? जो सरकारी स्कूलों में होता है।

What is that which happens in government schools that should not happen in JMC?

जे.एम.सी. की खूबियां।

Things that are special about JMC

Mind Mappingजिस तरह से सभी शिक्षको ने प्रश्न उठाये उससे लगता है कि पढाना आसान नहीं होता। लेकिन उसे आसान बनाया जा सकता है। सभी ने जो प्रश्न किये वह थे:

  1. बच्चो का पाठ्यक्रम एक बडी समस्या है अगर दो या उससे अधिक वर्ग के बच्चे एक साथ बैठे हो तो उनका पाठ्यक्रम कैसे समाप्त किया जाये?
  2. ऐसा कौन-कौन से तरीके अपनाए जाये जो कि बच्चो को समझने उसे करने मे आसानी हो जाये।
  3. बच्चो के साथ किस तरह के संबंध स्थापित किये जाये एक दोस्त की तरह या एक शिक्षक की तरह। तथा इन दोनो संबंधो के बीच कैसे सामंजस्य बिठाया जाये?
  4. बच्चो को किस तरह से गलत रास्ते से वापिस लाया जाये या किसी चीज के बारे में बच्चो को या उनके माता-पिता को कैसे समझाया जाये?
  5. कई बच्चो का अपने उम्र के हिसाब से पढाई का लेवल कम होता है उन बच्चो को सब के साथ कैसे पढाये?
  6. बच्चों को किस तरह से समझाया जाए कि उन्हे पढ़ाई का महत्व समझ में आ जाए?

Mind Mappingइस तरह के कई सवाल हमारे सामने आये। और हेमाजी ने बारीकी से तथा सुलझे ढंग से उन सभी सवालो के जवाब ढूंढने में और प्रकट करने में मदद कर हम सभी का मार्गदर्शन किया। सत्र की श्रृंखला से जो हमने सीखा उसका एक छोटासा विवरण जो हम पूरी तरह से जे.एम.सी. में लागू करने की कोशिश करेंगे।

  1. कुछ समय बच्चो को खुद का ग्रुप बनाकर बिठाना चाहिये जिससे आपस में अपने ज्ञान को बांट सके। बच्चो को विध्यार्थी नहीं बल्कि एक शिक्षक बनाने की कोशिश करनी चाहिये।
  2. कुछ एसी बाते होती है जो आपके समझाने पर बच्चे नहीं समझते या नहीं करते। और यदि वही बात उसका दोस्त कहता है तो वे उसे समझने की कोशिश करते हैं। इसलिये ज्यादातर बाते उनके सहपाठी के द्वारा ही समझाने की कोशिश करनी चाहिये।
  3. बच्चो से प्रत्येक सप्ताह एक फीड बैक फार्म भरवाना है कि उस सप्ताह वह क्या सीखे व क्या नहीं सीख पाये। उस आधार पर उनका ग्रुप बनाना चाहिये।
  4. बच्चो के द्वारा प्रष्न किये जाने पर उनका जवाब न दे बल्कि उसीसे संबंधित प्रष्न करे जिससे उसकी सोचने की क्षमता बढेगी।
  5. अभिभावक मीटिंग में पुराने बच्चो के अभिभावको को जिनका जे.एम.सी. पर पूरा भरोसा है उन्हे बोलने का मौका दिया जाना चाहिये। जिसका असर लोगो पर ज्यादा होगा बजाय हमारे बोलने का।
  6. वर्ग में पूरी कोशिश करनी चाहिये कि जब कुछ बनाने या लिखने को दिया जाये तो बच्चे एक दूसरे का काम देखकर बताये कि और बच्चो ने सही किया या नहीं।
  7. बच्चो के साथ ज्यादा तर समय दोस्ताना संबंध रखना चाहिये पर यह जरूरी है कि आपके और बच्चो के बीच एक सीमा रेखा निशचीत हो जिसे वह पार न कर सके।
  8. जो बच्चे अकेला रहना पसंद करते हैं या वर्ग में ज्यादा किसी से मतलब नहीं रखते उनके साथ वक्त देना चाहिये ताकि वो अपने दोस्तो के बीच खुलकर बोले।
  9. ज्यादा से ज्यादा कोशिश करनी चाहिये कि किसी भी विषय के हर एक टोपिक को बच्चे खुद पढे या खुद करे जिससे उनकी रिसर्च करने की क्षमता और रचनात्मकता में वृद्वि हो।
  10. जो पाठ्यक्रम है उसको एक टीचर पढायेगा और दूसरा उसको आंकलन करेगा।
  11. बच्चो को खुद की चुनौतियों को खुद पार करने के लिये उनको प्रेरित करना।
  12. ग्रुप में जब काम करते है उन बच्चो का आत्मविष्वास बढता है।

Mind Mappingइन सभी बातो के अलावा और भी बहुत सारी बाते प्रयोगों के साथ करवाये गये साथ-साथ उसके जवाब भी हमने ढूंड कर निकाला। इसके अलावा यह फैसला किया गया कि कुछ महिने बाद हम लोग फिर एक वर्कशोप का आयोजन करेंगे और एक महिने में क्या किया और बच्चो पर क्या असर हुआ। इस पर चर्चा कि जायेगी। इस दौरान् हम ने जो भी सखा है उसका अभ्यास करेंगे उदाहरण के लिये, चौथी से आठवी तक के पाठ्यक्रम तैयार करेंगे।