रिमेडियल विध्यार्थियों का ऐतिहासिक स्थलों का दर्षन

31 जनवरी 2015 जयषंकर मेमोरियल सेंटर में सुबह से ही विध्यार्थियों की षोर यह बता रही थी कि आज कुछ खास होने वाला है अब रंग बिरंगे कपडो के साथ खाने-पीने की चीजो से लैस बच्चे जरूर कहीं ना कहीं जाने की तैयारी कर रहे थे। जयषंकर मेमोरियल सेंटर से छाया रामटेके लाइब्ररी इन्चार्ज ज्योति रिमेडियल टीचर अतुल सागर के साथ एक सुहाने सफर पर बस खुली और बच्चो ने गानो के साथ सफर और भी खूबसूरत बना दिया।
 
1570 में स्थापित खूबसूरत विषाल कृति को देखते ही रहे लाल पत्थरो से बना इस भव्य स्मारक देखते ही रह गये। यह नई दिल्ली के दिनापनाह अर्थात् पुराने किले के निकट निजामुद्दिन पूर्व क्षेत्र में मथुरा मार्ग के निकट स्थित है। हूमायूॅं का मकबरा इमारत परिसर मुगल वास्तुकला से प्रेरित स्मारक है। यहां मुख्य इमारत मुगल सम्राट हूमायून का मकबरा है और इसमें कब्र सहित कई अन्य राजसी लोगों के कब्र है। यह समूह विष्व धरोहर है। एवं भारत में मुगल वास्तुकला में पहला उदाहरण है। इस मकबरे में वही चार बाण षैली जिसमें भविष्य में ताजमहल को जन्म दिया। यहां सभी बच्चे खूब घूमे और खुले मैदान में अनेक प्रकार के खेल खेले।
 
 
फिर वहां से निकल पडे तुगलकाबाद किले की तरफ। जो काफी विषाल और अपने इतिहास को बता रहा था। वहां पहंुचकर बच्चो की सारी जंजीरे टूटगए और उनकी जोष दुगुना होगई तुरंत अलग-अलग टीम बनाकर उन्होने पूरा किला घ्ूम लिया । उसमें कुछ बच्चे घूम रहे थे तो कुछ बच्चे किले के उंची-उंची टिले पर पहंुच कर वहां से दिल्ली का नजारा देख रहे थे। अंत के पलो में सभी बच्चो को घियासुद्दीन के मकबरे पर लेकर गये जो तुगलकाबाद के दूसरी तरफ था। वहां जाकर बच्चो ने अनेक तरह के खेल खेले। फिर थोडा आराम कर अपनी घर की ओर निकल पडे। बस में अंताक्षरी के साथ अपने सफर को समाप्त करते हुए षाम की बेला में अपने घर को लौट गए।